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Mar 25, 2019
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23 मार्च – शहीद दिवस

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आज २३ मार्च , काफी लोगोंको को तो ये भी पता नहीं होगा की आज का दिन हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है. क्यूंकि आज ही के दिन हमने देश के कोहिनूर हीरे से ज्यादा तिन तिन मौल्यवान हिरे खोये थे. आज ही के दिन १९३१ में भारत के वीर सपुतोंको भगत सिंग , राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गयी थी.

क्या हम उस लायक भी है ?
जो आझादी दी कीमत समझे.
क्या दिल में हमारे कुछ अंश भी है?
जो शहिदोंकी कुर्बानी समझे.

आज जो Freedom of Expression का।
जो ढिंढोरा पिटते हो.
फिर भी चीख चीख के भोंकते हो.
डर लगता देश में रहने को

काश उस समय भी तुम पैदा हुए होते.
आझादी क्या होती थी तुम जान तो जाते
जानके शहिदोंको एक बार नमन तो करते.
क्या क्या कर गए वो , आज का सवेरा लाते लाते.

क्या हम उस लायक भी है ?
जो आझादी दी कीमत समझे.

मौत तो हररोज का उनका खेल था.
कब बाजी इधर , कब उधर पलट जाये
आज नारे लगा रहे देश के आझादी के।
कल पता नहीं सोया हुवा बदन वापीस घर आ जाये

क्या कल्पना की होगी उन शहीदोंने
की आज कुर्बानी जाती है तो जाये
कल आझाद भारत में शेर पैदा होंगे
शेर जैसे लढेंगे , शेर जैसे मरेंगे.

यहाँ आधे से ज्यादा तो कुत्ते पैदा होगये
कांटने वाले कम और भोंकने वाले ज्यादा होगये
खाना घर का खायेंगे , पड़ोसिकी रखवाली करेंगे

क्या हम उस लायक भी है ?
जो आझादी दी कीमत समझे.
क्या हम उस लायक भी है ?
जो आझादी दी कीमत समझे.

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